किस आईपीओ में पैसा लगाएं


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  • Author samco

अब वह समय नहीं रहा है जब लिस्टिंग के पहले दिन धन कमाने के लिए आप किसी भी आईपीओ में निवेश कर सकते थे. आज यह आवश्यक है कि हर आईपीओ का मूल्यांकन कर केवल उनमें निवेश किया जाए जो लम्बी रेस के घोड़े सिद्ध हों. इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ऐसी कंपनियों को कैसे चुनें जिनका भविष्य उज्ज्वल हो.

1. पूँजी का निवेश कहाँ होगा?

कंपनी के प्रॉस्पेक्टस को ध्यान से पढ़ें. उसमें यह पता लगाएं कि सार्वजनिक  होने पर जो बड़ी राशि एकत्र होगी, उसका उपयोग कैसे किया जाएगा? कंपनी कुछ नए उत्पाद बाज़ार में ला सकती है, नए अनछुए क्षेत्रों में अपने पंख फैला सकती है, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बनवा सकती है या ऋण उतार सकती है. इनमें से कोई भी गतिविधि या कुछ गतिविधियाँ कंपनी की आय में वृद्धि करने में सक्षम हो सकती हैं. अगर पूँजी सही जगह लगाईं जाएगी, तो निवेश अच्छा होने की  संभावनाएं भी अधिक होंगी.

2. कंपनी के उत्पाद जांचें

कंपनी के उत्पाद की बाज़ार में कितनी धाक है, यह जांच लें. अगर उनका प्रोडक्ट अच्छा है और उनके प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर कुछ करता है, तो कंपनी की सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. वहीँ अगर कंपनी ऐसे क्षेत्र में काम करती है, जहाँ पहले से बहुत से प्रतिद्वन्द्वी बाज़ार पर पकड़ बनाए हुए हों, तो ऐसी कंपनी में निवेश करना घाटे का सौदा सिद्ध हो सकता है - जैसे कोला मार्किट पर कोका कोला और पेप्सी की पकड़ तोड़ पाना बहुत मुश्किल है.

3. व्यावसायिक क्षेत्र की संभावनाएं जांचें

कंपनी जिस समय सार्वजनिक हो रही हो, तब उसकी  व्यावसायिक क्षेत्र में प्रगति की संभावनाओं  पर ध्यान दें. उदाहरण के लिए, इस समय उबेर सरीखी मार्केटप्लेस एप्प का बोलबाला है. वहीँ बायोटेक को अगला बड़ा विकास का इंजन माना जा रहा है., ऐसे में इन क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियाँ निवेश की दृष्टि से आकर्षक हैं. ऐसे ही कुछ वर्ष पूर्व आईटी क्षेत्र में उछाल आया था, तब उन कंपनियों में निवेश पर निवेशकों को काफी लाभ मिला.

4. प्रबंधन टीम कैसी है?

किसी भी नई कंपनी में निवेश दरअसल उसकी प्रबंधन टीम की प्रतिभा में निवेश होता है. इस बारे में जो भी हो सके, पता लगाइए. जानें कि इससे पहले ये क्या कर रहे थे, पिछली कंपनियों में इन्होंने कितनी सफलता पाई; और उनके खुद के मूल्य क्या हैं. कोई वैयक्तिक निवेशक शायद उनसे सीधे बात न कर पाए, पर उनके इंटरव्यू से ही अनुमान लगाएं कि उन पर विश्वास किया जा सकता है या नहीं.

5. अंडरराइटर कौन है?

किसी भी बड़े आईपीओ को बड़े और स्थापित अंडरराइटर ही लेकर आते हैं. अगर किसी आईपीओ के पीछे केवल छोटे इन्वेस्टमेंट बैंक ही खड़े हों. तो इनसे दूरी बनाए रखने में ही समझदारी है. साथ ही, इस बात पर भी गौर करें कि प्रतिद्वंद्वियों  के मुकाबले नई कंपनी का मूल्यांकन कैसा है. अगर पी-ई अनुपात प्रतिद्वंद्वियों से कहीं अधिक है तो शेयर बाज़ार में स्टॉक की कीमत गिरेगी ही, वहीँ अगर यह अनुपात ज्यादा कम हो तो हो सकता है कि कंपनी में कुछ गड़बड़ हो.

6. संस्थागत निवेशकों पर नज़र रखें

किसी नई कंपनी का मूल्यांकन करने के लिए जितनी जानकारी चाहिए होती है वह एक वैयक्तिक निवेशक को उपलब्ध नहीं होती. ऐसे में उसे इसपर नज़र रखनी चाहिए कि संस्थागत निवेशक क्या कर रहे हैं. अगर किसी आईपीओ को संस्थागत निवेशकों ने हाथों हाथ लिया है और उस सेक्टर में आईपीओ ओवरसब्सक्राइब हो चला है - तो यह आईपीओ निवेश के लिए अच्छा मौका है. ऐसा यों कि संस्थागत निवेशकों के पास अधिक जानकारी और मापदंड होते हैं जिनके चलते वे सही मूल्यांकन कर पाते हैं.

किस आईपीओ में पैसे लगाएँ, यह तय करना शुरुआत में कठिन प्रतीत हो सकता है, पर ऊपर कही बातों का ध्यान रखें तो यह नामुमकिन नहीं. ध्यान रहे कि अगर कंपनी का मूलभूत स्वरूप मजबूत है, तो इसमें निवेश के अच्छे मौके फिर से आएँगे. यह ज़रूरी नहीं कि आप ज़ल्दबाज़ी करके आईपीओ में ही पैसा लगाएं. अगर इस समय कंपनी को जांच पाना आपके लिए मुमकिन नहीं, तो थोडा इंतज़ार कर लें और अगले आईपीओ को ढंग से जांच कर ही निर्णय लें. किसी भी अच्छी कंपनी का मूल्यांकन रातों-रात बदल नहीं जाएगा.

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